क्रिया भवन में नोवै तीर्थंकर सुविधिनाथ का हुआ गुणगान
जोधपुर । श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक तपागछ संघ के तत्वाधान में चल रहे चौबीस तीर्थंकर व वर्धमान तप आराधना के तहत आठवें दिन तीर्थंकर सुवधिनाथ भगवान की पूजा अर्चना महिमा गुणगान किया गया । संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया क्रिया भवन में मुनि सिद्धेशचन्द्रसागर म.सा. व मुनि सिद्धचंद्रसागर व साध्वी नयप्रज्ञाश्री मोक्षरत्नाश्री . आदि ठाणा के सान्निध्य में सामुहिक तपस्या* की कड़ी में चौबीस तीर्थंकर तप* (सर्व दुःख निवारण तप) व वर्धमान तप आराधना तहत् नोवै दिन तप आराधकों ने उपवास कर जैन धर्म के नोवै तीर्थंकर सुवधिनाथ भगवान चैत्यवंदन देववंदन पूजा अर्चना महिमा गुणगान किया गया। संघ सचिव उम्मेदराज रांका विनायकिया ने बताया आराधना तहत्त श्रावक भेरूमल कांताबेन मेहता परिवार की ओर से तप आराधकों के बियासना आराधना का लाभ लिया जा रहा है ।क्रिया भवन में सिद्धचंद्रसागर ने नोवै तीर्थंकर सुवधिनाथ भगवान के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने द्रोपती के पूर्व भव के बारे में बताते हुए कहा कि धर्म करते वक्त धर्म का फल नहीं मांगना चाहिए फल मांगने से मोक्ष सुख नहीं मिलता संसार में भटकना पड़ता है उन्होंने कहा कि सदैव स्मरण रखना चाहिए कि इस जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है रोग मुत्य कभी भी दस्तक दे सकते हैं इसलिए जितना हो सके सत कर्मों से अपने जीवन को अलंकृत करें व अपनी आत्मा को कर्म बंधन से मुक्त बनाने का प्रयास करें।