आगम का एक-एक पद महत्वपूर्ण : सिद्धचंद्रसागर
क्रिया भवन में चल रहा तप तपस्या का ठाट बाट
जोधपुर। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागछ संघ के तत्वाधान में चल रहे चौबीस तीर्थंकर व वर्धमान तप आराधना में आराधक बढ़-चढक़र भाग ले रहे है।
संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया क्रिया भवन में मुनि सिद्धेशचन्द्रसागर म.सा. व मुनि सिद्धचंद्रसागर व साध्वी नयप्रज्ञाश्री मोक्षरत्नाश्री . आदि ठाणा के सान्निध्य में सामुहिक तपस्या* की कड़ी में चौबीस तीर्थंकर तप* (सर्व दु:ख निवारण तप) व वर्धमान तप आराधना 48 दिवसीय का भव्य आयोजन के तहत् तप आराधकों ने छठे दिन चैत्यवंदन देववंदन पूजा अर्चना महिमा गुणगान किया गया। संघ सचिव उम्मेदराज रांका विनायकिया ने बताया आराधना तहत्त श्रावक भेरूमल कांताबेन मेहता परिवार की ओर से तप आराधकों के बियासना आराधना का लाभ लिया जा रहा है। विनायकिया ने बताया चौबीस तीर्थंकर वर्धमान तप आराधना के तहत शनिवार को जैन धर्म के छठे तीर्थंकर पदमप्रभुस्वामी की पूजा अर्चना महिमा गुणगान किया जाएगा। क्रिया भवन में सिद्धचंद्रसागर ने कहा आगम का एक एक पद बहुत ही महत्वपूर्ण है आगम का ध्यान पूर्वक श्रवण करने से आत्मा मोक्ष की ओर अग्रसर होती है । उन्होंने कहा धर्म जितना कठिन है उतना सरल है , जितना सरल है उतना ही कठिन है इसलिए धर्म पर श्रद्धा रख कर कार्य करने से अवश्य ही आत्म कल्याण होगा। जिस प्रकार अलग अलग नदियों समुद्र में समावेक्ष हो जाती हे वैसे ही चौबीस तीर्थंकरों की आराधना आत्म कल्याण में समावेश हो जाता है ।