थैलेसेमिया हीमोफीलिया व स्वैच्छिक रक्तदान प्रोत्साहन कार्यशाला
जैसलमेर। शुक्रवार को राजकीय श्री जवाहिर चिकित्सालय जैसलमेर के सभागार में थैलेसेमिया हीमोफीलिया व स्वैच्छिक रक्तदान प्रोत्साहन कार्यशाला का आयोजन किया गया, इसमें मीडियाकर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्वैच्छिक रक्तदाताओं, सरकारी महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों एवं थैलेसेमिया हीमोफीलिया से ग्रसित परिजनों ने भाग लिया । रक्तदाता स्तुति के साथ कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जे.आर. पंवार ने अपने उद्बोधन में कार्यशाला के मूल उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर फील्ड ऑफीसर (ब्लड सैल) अर्जुन कुमार काग ने हीमोफीलिया व थैलेसेमिया के बारे में प्रारम्भिक जानकारी देते हुए सरकारी सुविधाओं के बारे में अवगत करवाया। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने हीमोफीलिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह बीमारी आनुवांशिक है जिसमें माता संवाही होती है व प्रायः पुरुष ग्रसित होते हैं । उन्होंने बताया कि यह रोग रक्त में फैक्टर 8 व 9 की कमी से होता है जिसकी वजह से रोगी में चोट लगने पर अनियंत्रित रक्तस्राव होता है व मुख्य जोड़ प्रभावित होते हैं। इनके उपचार हेतु सरकारी चिकित्सालय में फैक्टर 8 व 9 के मुफ्त इन्जेक्शन उपलब्ध हैं। उन्होंने विवाह के समय जन्मकुण्डलियाँ मिलाने के साथ जैनेटिक कुण्डलियों के मिलान की आवश्यकता पर भी जोर दिया । शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश जांगिड़ ने थैलेसेमिया रोग के बारे बताया कि यह भी आनुवांशिक है, जिसमें रोगी में विकृत हीमोग्लोबिन बनता है और इसके फलस्वरूप यह रक्त शरीर में ज्यादा टिक नहीं पाता। इस प्रकार के बच्चों में थकावट, शिथिलता, साँस में तकलीफ आदि के साथ ही शाारीरिक विकास भी बाधित होता है। ऐसे में रोग की गंभीरता के अनुसार इन्हें बार-बार रक्त की आवश्यकता रहती है । रक्तकोष प्रभारी डॉ. दामोदर खत्री ने रक्तदान के महत्व व आवश्यकता के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18-60 वर्ष की आयु का 12.5 ग्राम/डीएल हीमोग्लोबिन वाला कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक है तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है । उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी प्रतिभागियों से इस पुनीत कार्य मे सहभागी बनने का आह्वान किया, ताकि रक्तकोष हमेशा भरा रहे व रक्त की कमी से किसी का परिवार न उजड़े। कार्यशाला में थैलेसेमिया ग्रसित परिजनों ने अपने अनुभव साझा किये। हीमोफीलिया सोसायटी के अध्यक्ष राणीदान जोशी ने बताया कि जिले में हीमोफीलिया के लगभग 20 रोगी हैं जिन्हें अस्पताल से मुफ्त इंजेक्शन की सुविधा से लाभान्वित किया जाता रहा है।रामदेव शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के जयप्रकाश आचार्य व जगदम्बा आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र के रामेश्वर बोरावट ने भी विचार व्यक्त किये । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कमलेश चैधरी ने रक्त दान के महत्व पर जानकारी देते हुए सबसे बड़़ा माने जाने वाले इस पुण्य कार्य में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने हीमोफीलिसा व थैलेसेमिया के रोगियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी व थैलेसेमिया सोसायटी के गठन की आवश्यकता प्रतिपादित की । कार्यशाला का संचालन रक्तकोष प्रभारी डॉ. दामोदर खत्री ने किया ।