रहमतों और बरकतों का महीना रमजान शनिवार से
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। रहमतों और बरकतों का महीना रमजान शनिवार से शुरू हो रहा है। रमजान के इस पूरे महीने में लोग रोजा रखेंगे और जकात और खैरात देंगे। गुरुवार को चांद दिखाई नहीं देने के कारण माह-ए-रमजान आज से शुरू नहीं हो सका। इस बार कोरोनावायरस व लॉकडाउन के चलते मुस्लिम समाज के लोग घरों में ही नमाज पढेंग़े और इबादत करेंगे।
काजी मोहम्मद तय्यब, शहर खतीब व अध्यक्ष चांद कमेटी, जोधपुर एवं मुफ्ती ए राजस्थान मौलाना शेर मोहम्मद खान रिज़वी ने संयुक्त बयान जारी कर मुस्लिम समाज से अनुरोध किया है कि वे रमजान में नमाज अपने घरों में ही अदा करें। तरावीह की नमाज भी अपने-अपने घरों में ही अदा करें। प्रशासन की ओर से रमजान के दौरान फल-फू्रट, सब्जी, दूध वगैरह का पूरा इंतजाम क्षेत्र में किया जाएगा ताकि किसी रोजेदार को तकलीफ न हो। उन्होंने बताया कि 25 अप्रेल को जोधपुर शहर के रोजेदारों के लिए सेहरी का वक़्त सुबह 4 बजकर 38 मिनट और इफ्तार का वक्त शाम 7 बजकर 9 मिनट रहेगा। बता दे कि चांद दिखने के बाद जिस दिन चांद दिखता है उस दिन रोजेदार रात की अंतिम और पांचवीं नमाज इशा की 17 रकात नमाज के बाद 20 रकात तरावीह की विशेष नमाज पढ़ते हैं। इसमें कुरान शरीफ पढ़ा जाता है। रमजान का महीना खत्म होने और ईद से पहले हर रात तरावीह की विशेष नमाज पढ़ी जाती है।
कोरोना महामारी के मद्देनजर मुस्लिम धर्म गुरुओं, विद्वानों तथा धार्मिक व सामाजिक संगठनों की ओर से मुसलमानों से रमज़ान के महीने में धार्मिक क्रिया कलाप से सम्बन्धित अपील की गई है। उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान रमज़ान के महीने में प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। अपील में कहा गया कि जिस प्रकार अब तक लॉकडाउन के दौरान मस्जिदों में अज़ान दी जाती रही और केवल इमाव व सेवक ही नमाज़ अदा करते रहे और बाक़ी लोग घरों में ही नमाज़ अदा करते रहे, रमज़ान में भी उसी तरीक़े से करते रहें। धर्म गुरुओं ने लोगों से अपील की है कि वे तरावीह व अन्य नमाज़ों के लिए पास पड़ोस के लोगों को बिल्कुल भी इक_ा न करें। इबादत के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। उन्होंने यह भी अपील की कि सहरी व इफ़्तार घरों में ही करें और इफ़्तार पार्टी और दावतों से पूरी तरह बचें। रमज़ान इबादत का महीना है अत: ईश्वर से क्षमा याचना, उसका स्मरण, और प्रार्थना में विशेष रूप से समय बिताएं, अपने घर के लोगों को अच्छी बातें बताएं और धर्मिक पुस्तकों, विशेष रूप से पवित्र क़ुरआन का व्याख्या सहित अध्ययन करें।