काजरी ने सिर्फ 15 हजार रुपए में बनाया सेल्फ डिसिंफेक्टेंट वॉक इन टनल
जोधपुर। कोरोना वायरस के वैश्विक प्रकोप के कारण भारत सहित अधिकांश देशों में गंभीर महामारी पैदा हो रही है। राष्ट्रीय लॉकडाउन से कोरोना के फैलाव को रोकने में काफी मदद मिली है। इस लॉकडाउन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों में सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए न्यूनतम श्रमशक्ति के साथ पशुधन रख रखाव, नर्सरी प्रबंधन, फसल कटाई, हरा चारा उत्पादन आदि जैसे आवश्यक कत्र्तव्यों की जिम्मेदारी की देख-रेख हो रही रहे हैं। वायरस के संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए स्वच्छता एवं आपस में दूरी दैनिक दिनचर्या में जरुरी है।काजरी निदेशक डॉ. ओपी यादव ने बताया कि इसे देखते हुए काजरी ने एक सेल्फ-डिसिन्फेक्टेंट वॉक-इन टनल विकसित किया है जिसका उपयोग काजरी कैम्पस में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है। इस इकाई को लोहे की लम्ब चौरस संरचना पर एल्यूमीनियम प्रोफाइल का उपयोग करके यूवी स्टेब्लाइज्ड पॉलिथीन शीट लगाकर बनाया गया है। कीटाणुनाशक को 500 लीटर क्षमता के एक टंकी से कक्ष के अंदर लगाए गए फॉगर्स द्वारा इंसान के शरीर पर छिडक़ाव किया जा सकता है। एक आधे एचपी के पंप से फिल्टर द्वारा चैंबर में पानी की आपूर्ति की जाती है, टू वे स्विच से अन्दर आते वक्त व्यक्ति इसे चालू करेगा और बाहर निकलकर बंद करेगा। कम से कम 5 सैकेंड की सेल्फ-डिसिन्फेक्टेंट वॉक के लिए प्रति व्यक्ति 275 एमएल कीटाणुनाशक चाहिए, जिसकी लागत प्रति व्यक्ति लगभग 20 पैसे है। कीटाणुनाशक सुरंग से बाहर निकल के व्यक्ति साफ़ पानी एवं साबुन से मुंह और हाथ धो सकते है। यह इकाई काजरी कार्यशाला में डॉ. प्रतापसिंह खापटे, डॉ. आर. सोलंकी, डॉ. प्रदीप कुमार, सफीउल्लाह अंसारी, जालमसिंह, अमितसिंह, दिनेश विमल, पीसी बावनकर, संजय पुरोहित, तेजाराम एवं पृथ्वीसिंह ने मिलकर निर्मित की है, पूर्ण इकाई की अनुमानित लागत लगभग 15 हजार रुपए है। इससे आसानी से निर्मित कर सकते है व जरुरत पर इसकी क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है। काजरी में आने वाले अधिकारी, कर्मचारी एवं कॉलोनीवासी इसका इस्तेमाल कर रहे है, इससे कोरोना संक्रमण को रोकने में काफी मदद मिलेगी।