जोधाणा वृद्धाश्रम के 13 बुजुर्गों का एक साथ मनाया जन्मदिन
जोधपुर। संत हरिराम शास्त्री महाराज ने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचे बुजुर्ग व वृद्धजन की महत्ता परिवार व समाज के लिए कभी भी कम नहीं हो सकती है। वे हमेशा सम्मान के हकदार है। उनके अनुभव से परिवार व समाज काफी सीख सकता है। शास्त्रीजी ने बदलते परिवेश में बुजुर्गों की हो रही उपेक्षा पर चिंता जताई और इस दिशा में समाज व सरकार द्वारा ठोस कदम उठाने की जरूरत भी बताई।
संत ने यह विचार जोधाणा वृद्धाश्रम के वृद्धजनों की पुण्यसेवा को समर्पित स्वर्गीय बंशीलाल व मोहनी देवी शर्मा की स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा की पूर्ण आरती व जोधाणा जनकल्याण सेवा समिति के आयोजित वार्षिकोत्सव पर प्रकट किए। उन्होंने कहा कि पहले औसत आयु कम होने के बावजूद परिवार व समाज में वृद्धजनों का पूरा सम्मान होता था, अब व्यक्ति की औसत आयु में वृद्धि होती जा रही है, लेकिन वो सम्मान नहीं मिलता है। परिवार सिमटते जा रहे हैं और दंपती का अपने बच्चों पर ही फोकस रहता है। उनकी अपने माता-पिता के प्रति संवेदनशीलता में कमी आ रही है। यह समाज के लिए भयावह संकेत है तथा इससे रिश्तों के ताने-बाने को खतरा होने की आशंका है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा कि बुजुर्गों की उपेक्षा में बढ़ोतरी होना वाकई चिंता का प्रश्न है। इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं को और काम करने की जरूरत है। जोधाणा जनकल्याण सेवा समिति की सचिव व पूर्व पार्षद प्रतिभा गहलोत ने कहा कि शिक्षा के फैलाव के साथ बुजुर्गों के सम्मान में कमी आना चिंताजनक है। शिक्षा में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए। आस्था वृद्धाश्रम के संचालक राजेंद्र परिहार, सत्पथ सोसायटी के सचिव राजेश गहलोत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर 30 भामाशाहों व सेवादारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया। जोधाणा वृद्धाश्रम के संचालक रतनसिंह गहलोत ने स्वागत भाषण दिया तथा संस्था के कार्यों की जानकारी दी। समिति के अध्यक्ष गुलाबचंद खींची ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन दीपक गहलोत ने किया। इस अवसर पर जोधाणा वृद्धाश्रम में रह रहे 13 बुजुर्गों का केक काटकर जन्मदिन मनाया।