भारत के मूल में ही धर्म है, भारत उसे जानता ही नहीं जीता भी है : मोहन भागवत
छोटी खाटू में जैन श्वेतांबर तेरापंथ के 162वें मर्यादा महोत्सव में बोले RSS सरसंघचालक
आचार्य महाश्रमण से लिया आशीर्वाद, मर्यादा व अहिंसा पर दिया जोर
डीडवाना–कुचामन / छोटी खाटू।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को राजस्थान के डीडवाना–कुचामन जिले के छोटी खाटू पहुंचे, जहां उन्होंने जैन श्वेतांबर तेरापंथ के 162वें मर्यादा महोत्सव में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा जैन समाज और संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
अपने उद्बोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत के मूल में ही धर्म है। भारत धर्म को केवल जानता नहीं, बल्कि उसे जीता है। भारत के हर कण में धर्म समाया हुआ है। संयम, संतुलन, अनुशासन और व्यवहार ही धर्म के मूल तत्व हैं। धर्म सबको साथ लेकर चलता है और उन्नति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में स्वार्थ सिद्धि ही व्यवस्था बन गई है, जबकि भारत ऐसा नहीं करता, क्योंकि भारत धर्म को जानता है और उसी के अनुसार आचरण करता है।
दिखते अलग-अलग हैं, लेकिन मूल में हम सब एक
भागवत ने कहा कि भारत में लोग भले ही अलग-अलग दिखाई देते हों, लेकिन मूल रूप से सब एक हैं। यहां सब अपने हैं। समानता के भाव से ही जीवन में मर्यादा आती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खेती में कीटों का विनाश नहीं, बल्कि नियंत्रण किया जाता है ताकि संतुलन बना रहे। यही भारत की सोच है।
दुनिया को मर्यादा और आचरण सिखाना भारत का दायित्व
उन्होंने कहा कि दुनिया को मर्यादा और आचरण सिखाना भारत का कार्य है। भारत का धर्म बताता है कि कब क्या करना है और कब क्या नहीं करना है। भारत बिना स्वार्थ के पूरी दुनिया की चिंता करता है। पाकिस्तान की बाढ़, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका को दी गई सहायता इसका उदाहरण है। भारत के विश्व से संबंध बल या आर्थिक ताकत के नहीं, बल्कि आत्मीयता के हैं।
मर्यादा में चलेंगे तो देश आगे बढ़ेगा
मोहन भागवत ने कहा कि जैसे सूर्य स्वयं प्रकाश देता है, वैसे ही हमें भी अपने आचरण से उदाहरण बनना चाहिए। मनुष्यत्व, मुमुक्षुत्व और महापुरुषत्व का पालन करके ही मर्यादा कायम रह सकती है। जब आचरण और व्यवहार सही रहेगा, तब नियम बनेंगे, अपराध घटेंगे, प्रकृति संतुलित रहेगी और देश आगे बढ़ेगा।
जहां कानून असफल होता है, वहां धर्म मार्गदर्शन करता है
भागवत ने कहा कि कानून का पालन सभी का कर्तव्य है, लेकिन कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनका समाधान कानून भी नहीं कर पाता। ऐसे में धर्म मार्गदर्शन का कार्य करता है।
भारत अहिंसक है, लेकिन सुरक्षा के लिए शस्त्र उठाना भी आवश्यक
इस अवसर पर आचार्य महाश्रमण ने कहा कि भारत अहिंसा का देश है और साधु-संत अहिंसा का ही संदेश देते हैं। भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया, बल्कि सभी से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए। लेकिन जब देश की सुरक्षा की बात आती है, तब मजबूरी में शस्त्र उठाना भी आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य मर्यादा में रहता है, तब तक शांति बनी रहती है। समुद्र और सूर्य भी मर्यादा में रहते हैं, तभी संसार में संतुलन बना रहता है। जब मर्यादा टूटती है, तब विनाश होता है। इसलिए जीवन में अहिंसा और मर्यादा को अपनाकर ही मानव जीवन को सफल बनाया जा सकता है।