धर्मधरा सोजत में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज देंगे कथा वाचन

 पूरप्णेश्वर धाम में होगा भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ

  1. सोजत । धर्मधरा सोजत की पावन भूमि स्थित पूरप्णेश्वर धाम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रख्यात कथा वाचक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज द्वारा 12 जनवरी से 18 जनवरी तक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज अपनी मधुर, ओजस्वी एवं रसपूर्ण वाणी से भक्तों को कथा अमृत का रसपान कराएंगे।

कथा आयोजन से जुड़े चेतन व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज वही संत हैं, जिनके हाथों से अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना उपवास तोड़ा था। इस दौरान स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को श्रीराम जी के चरणों का चरणामृत पिलाया था, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामीजी के चरण छूकर आशीर्वाद भी प्राप्त किया था।

स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष भी हैं। अयोध्या राम मंदिर में सोमवार 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधि-विधान से सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किए थे, जिसमें स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रख्यात कथा व्यास स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज का जन्म 25 जनवरी 1949 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के बेलापुर गांव में एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में किशोर मदनगोपाल व्यास के रूप में हुआ था। उन्हें अपने परिवार की धार्मिकता एवं आध्यात्मिकता की दीर्घ परंपरा विरासत में प्राप्त हुई।

उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने पैतृक गांव बेलापुर में पूर्ण की। इसके पश्चात वे स्वाध्याय परिवार के संस्थापक पांडुरंग शास्त्री अठावले द्वारा स्थापित तत्वज्ञान विद्यापीठ से जुड़े, जहाँ उनके मार्गदर्शन में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे वेदों, उपनिषदों एवं प्राचीन भारतीय ग्रंथों के गहन अध्ययन हेतु वाराणसी गए, जहाँ वैदिक विद्वान वेदमूर्ति आचार्य श्री किशोर व्यास के मार्गदर्शन में उन्होंने ‘दर्शनाचार्य’ की उपाधि अर्जित की।

तमिलनाडु स्थित कांची कामकोटी पीठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के आशीर्वाद से 30 अप्रैल 2006 को हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर उन्हें परमहंस संन्यास की दीक्षा प्रदान की गई। संन्यास दीक्षा से पूर्व वे आचार्य किशोर व्यास के नाम से जाने जाते थे, जबकि दीक्षा के पश्चात उन्हें औपचारिक रूप से स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज के नाम से पहचान मिली।

स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज पिछले लगभग 60 वर्षों से भगवद गीता, रामायण, महाभारत, शिव महापुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों पर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रवचन दे रहे हैं। उन्होंने अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, ऑस्ट्रेलिया सहित 10 से अधिक देशों में गीता और अन्य शास्त्रों पर कथाएं एवं प्रवचन दिए हैं, जहाँ गीता परिवार के माध्यम से भक्त वेदों और शास्त्रों का अध्ययन करते हैं।

स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने वेदों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से भारत में अनेक वैदिक विद्यालयों की स्थापना भी की है। सोजत में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के कथा श्रवण हेतु पहुंचने की संभावना है।

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