ये वतन सर तेरा कभी नहीं झूकने देंगे
आज हम ये कसम खाते है, जान दें देंगे पर तिरंगा नहीं झूकने देंगे: अमन अफजल साबरी
चोटिला (पाली)। हज़रत शहीद पीर दुल्हेशाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का शानदार उर्स मुबारक 21 से 23 अक्टूबर 2025 तक बड़ी शान-ओ-शौकत और अदब के साथ मनाया गया। सदर अमजद अली रंगरेज ने जानकारी दी कि हर साल की तरह इस साल भी उर्स में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी।
21 अक्टूबर (मंगलवार) को उर्स का आगाज़ खुसूसी खिताब से हुआ, जिसमें खलीफा-ए-हूज़ूर शैखुल इस्लाम, खतीब-ए-अहले सुन्नत हज़रत मौलाना कारी अब्दुरसत्तार साहब कादरी अशफाकी (सदर, पाली जिला हिलाल कमेटी एवं खतीब-ओ-इमाम, मुस्लिम मुसाफिर खाना मस्जिद, पाली) तथा हज़रत मौलाना दानिश कफील साहब (इमाम, ईदगाह पाली) ने तकरीर पेश की।
कार्यक्रम की निजामत सैयद अमजद अली अमजद साहब “बुलबुले राजस्थान” ने की। इस मौके पर अल्हाज कारी मोहम्मद शरीफ रज़ा रिज़वी, मो. फिरोज हशमती, मो. फिरोज अशरफी, मो. तौफीक साहब सहित कई उलेमा-ए-किराम मौजूद रहे।
22 अक्टूबर (बुधवार) को बाद नमाज़-ए-इशा पगड़ी बंध समारोह व कव्वाली का आयोजन हुआ।
इसमें कव्वाल तौफीक रिजवान रोशन एंड पार्टी (जोधपुर) तथा इंटरनेशनल कव्वाल अमन अफजल साबरी एंड पार्टी ने “ना मरना याद आता है, ना जीना याद आता है…”, “मैं आशिक हूं मोहम्मद का मदीना याद आता है…” जमीन पर घर बनाया है, मगर जन्नत में रहते है। हमारी खुशनशबी है हम भारत में रहते है। मेरी अजमत मेरा रूतबा नहीं झुकने देंगी, ये वतन सर तेरा कभी नहीं झूकने देंगे। आज हम यह कसम खाते है जान देंगे पर तिरंगा नहीं झूकने नहीं देंगे जैसी मशहूर कव्वालियाँ पेश कर समा बाँध दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद इमरान मसूद अहमद (सहारनपुर), विधायक भीमराज भाटी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता संगीता बेनीवाल, जिलाध्यक्ष अजीज दर्द, पूर्व उपसभापति शम्मीम मोतीवाला, जिला जज पूरण कुमार शर्मा, बकरत अली, पार्षद इरफान बेली, पार्षद असलम खान, कांग्रेस नेता मेहबूब टी, मुस्लिम सदर हकीम खान, साबिर वकील सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। सभी मेहमानों का साफा व माला पहनाकर स्वागत किया गया।
मेला संयोजक नूर अली रंगरेज ने बताया कि मेले में लाइट एंड साउंड की व्यवस्था सैयद साउंड द्वारा की गई। एंकर सब्बीर अमन व आमिर रज़ा खान ने मंच संचालन किया। डेंटिंग व्यवस्था पप्पू टेंट हाउस (जहीर मकरानी) व कलीम अख्तर (पाली) ने संभाली। पाली पुलिस प्रशासन ने भी उत्कृष्ट सहयोग प्रदान किया।
23 अक्टूबर की देर रात कुल की रस्म अदा कर उर्स का समापन किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मेला कमेटी सदर अमजद अली रंगरेज, संयोजक नूर अली रंगरेज, हाजी बाली साहब, सेक्रेट्री हाजी तुराब अली रंगरेज, प्रवक्ता जीशान अली रंगरेज, मो. हसन भाटी आदि की अहम भूमिका रही।
चोटिला मेले में सैयद साउंड टीम की उम्दा व्यवस्था
कव्वाल अमन अफजल साबिर ने की सराहना, दरगाह कमेटी ने किया सम्मानित
पाली। पाली में आयोजित चोटिला मेले में सैयद साउंड के सदाकत अली एवं उनकी पूरी टीम द्वारा उत्कृष्ट साउंड व्यवस्था की गई। टीम की सराहनीय सेवाओं से मेले में आयोजित कार्यक्रमों का संचालन सुचारू रूप से हुआ।
प्रसिद्ध कव्वाल अमन अफजल साबिर ने सैयद साउंड टीम की तकनीकी व्यवस्था और सेवाभाव की प्रशंसा की। उत्कृष्ट योगदान के लिए दरगाह कमेटी की ओर से सदाकत अली और उनकी टीम को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राजस्थान सहित देशभर में एंकरिंग की सेवाएं, फिल्म डायरेक्टर के.सी. बोकाडिय़ा के हैं करीबी मित्र
पाली। प्रसिद्ध एंकर एस. अमन पिछले 18 वर्षों से चोटिला मेले में एंकरिंग का कार्य कर रहे हैं। अपनी प्रभावशाली आवाज़, सटीक प्रस्तुति और बेहतर संचालन शैली के कारण वे राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक जाने-माने एंकर के रूप में पहचान बना चुके हैं। एस. अमन मेडतासिटी, मीरा बाई नगरी के निवासी हैं और अब तक अनेक धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों में अपनी एंकरिंग सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। एंकरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय अनुभव के साथ वे फिल्म निर्देशक के.सी. बोकाडिय़ा के साथ भी लंबे समय से कार्य कर चुके हैं। अमन और बोकाडिय़ा अच्छे मित्र भी हैं, तथा कई मंचीय कार्यक्रमों में दोनों की साझेदारी दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रही है। ये है अमन के खास बात: सोजत में जन्में एस अमन के लिए उनके पिता अजीज खान का प्रोत्साहन विशेष मायने रखता है। पिछले तीन दशक से मेड़तासिटी में रह रहे अमन की शिक्षा वहीं हुई। मंच संचालन की शुरुआत काव्यगोष्ठी से हुई। इसके बाद मंच संचालन का शौक परवान चढ़ता गया और धीरे-धीरे वे मंच संचालक ही बन गए। अमन जितने अच्छे मंच संचालक है, उतने अच्छे शायर भी है। हिन्दी और अग्रेजी साहित्य में स्नातक हैं। आवाज की दुनिया के यातनाम अमीन सयानी, हाजी जफर खान सिंधी, ओम आचार्य आदि ने अमन को प्रभावित किया हैं।