यह वो देश नहीं जिसका मैंने सपना देखा था : गांधी
अधिस्वीकृत पत्रकार गुलाम मोहम्मद, सम्पादक, सेवा भारती, जोधपुर
सुरेश हिन्दुस्तानी के निर्देशन में खेला गया नाटक काया में काया
जोधपुर। भारत को अखण्ड बनाए रखने का मेरा लक्ष्य यदि विफल रहा, तो भारत को बांटने की सफलता से आपको जीत जैसा अहसास होता है मिस्टर जिन्ना ….., जब हमारे करोड़ों हिन्दुस्तानी ग़रीब, शोषण, करप्शन और कुपोषण का शिकार होते हैं तो ऐसे में काग़ज़ के नोटों पर अपना खिलखिलाता चेहरा देखकर मुझे घृणा होती है…., ऐसे ही संवादों के साथ भारत की वर्तमान राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिये मंच पर गांधी प्रकट होते हैं और वर्तमान पीढ़ी को साक्षी बनाकर अपने समय के सहयोगियों और विरोधियों से सीधा संवाद करते दिखाई देते हैं…. आनन्द वी. आचार्य रचित नाटक काया में काया के अन्तर्गत। जिसका मंचन आकदमी सचिव डाॅ. सरिता फिड़ौदा के नेतृत्व में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर के सहयोग से 32वें ओम शिवपुरी स्मृति राष्ट्रीय स्तरीय नाट्य समारोह के तीसरे दिन शुक्रवार को जयनारायण व्यास स्मृति भवन, टाउन हाॅल में हुआ।
बीकानेर के नवयुवक मण्डल की प्रस्तुति में सुरेश चन्द्र खत्री उर्फ सुरेश हिन्दुस्तानी के कसे हुए निर्देशन में आज़ाद न्यायसंगत अखण्ड भारत की इच्छा लिये महात्मा गांधी की छटपटाहट और गांधी के विचारों को प्रकट करते इस नाटक में गांधी की भूमिका जय खत्री ने बख़ूबी निभाई, मोहम्मद अली जिन्ना की भूमिका उत्तम सिंह ने अपने दमदार संवाद के साथ तथा गोडसे के रूप में नवेद भाटी ने अभिनय की छाप छोड़ी, रविराज भाटी ने नेहरू, अक्षय सियाता ने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और अनिल बांधड़ा ने सरदार पटेल एवं रामानुज की भूमिका के साथ न्याय किया वहीं कस्तूरबा के रूप में पूनम चौधरी और बिहारी के रूप में रोहित वाल्मिकी ने अपनी उपस्थित दर्ज की। मंच परे प्रकाश व्यवस्था विशाल खत्री, रूप सज्जा कैलाश गहलोत और संगीत संयोजन गजेंद्र सिंह भाटी ने किया।
नाट्य समारोह में शनिवार 19 अक्टूबर को जयपुर के अभषेक मुद्गल निर्देशित नाटक महारथी का मंचन किया जाएगा।