क्रिया भवन में हो रहा तीर्थंकरों का गुणगान
जोधपुर। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक तपागछ संघ के तत्वाधान में चल रहे चौबीस तीर्थंकर व वर्धमान तप आराधना के तहत हो रहा। तीर्थंकरों की पूजा अर्चना महिमा गुणगान संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया क्रिया भवन में मुनि सिद्धेशचन्द्रसागर म.सा. व मुनि सिद्धचंद्रसागर व साध्वी नयप्रज्ञाश्री मोक्षरत्नाश्री आदि ठाणा के सान्निध्य में सामुहिक तपस्या की कड़ी में चौबीस तीर्थंकर तप (सर्व दुःख निवारण तप) व वर्धमान तप आराधना तहत् तप आराधकों ने उपवास कर जैन धर्म के तीर्थंकरों के चैत्यवंदन देववंदन पूजा अर्चना महिमा गुणगान किया गया।
संघ के बलवंत राज खिवसरा रांका विनायकिया ने बताया आराधना तहत्त श्रावक भेरूमल कांताबेन मेहता परिवार की ओर से तप आराधकों के बियासना आराधना का लाभ लिया जा रहा है । क्रिया भवन में सिद्धचंद्रसागर ने कहा की आदिनाथ भगवान दूर दृष्टिगामी थे जो आज सार्थक हो रही है उन्होंने आदिनाथ के जीवन चरित्र पर विशेष प्रकाश डाला उन्होंने हिंसा के तीन प्रकार बताते हुए कहा कि प्रथम स्वरूप हिंसा दूसरी हेतु हिंसा व तीसरी अनुबंध हिंसा होती है। उन्होंने कहा की जहां तक हो सके हिंसा के भाव बिल्कुल नहीं लाने चाहिए।