वक्त पड़े तो बेटियां काम आती हैं…..

‘साहित्य संगम’ की काव्य गोष्ठी में जीवन के विविध रंगों का शब्दांकन

जोधपुर। सूर्यनगरी की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था ‘साहित्य संगम’ की ओर से शनिवार को सेठ रघुनाथदास परिहार धर्मशाला के सभागार में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में शहर के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के विविध रंगों का काव्यात्मक चित्रण किया।
गोष्ठी के प्रारम्भ में साहित्य संगम के संस्थापक स्मृतिशेष मदन मोहन परिहार की लघु कविता ‘बचपन में मिट्टी के घरोंदे बनाने वाले मन को पता नहीं था कि जवानी में मकान किराए लेना पड़ेगा’ प्रस्तुत की गई। नामवर शाइर हबीब कैफी ने गजल ‘छोटी-मोटी नेकियां काम आती हैं, वक्त पड़े तो बेटियां काम आती हैं’, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यनारायण ने भविष्य की चिंताओं को रेखांकित करते हुए कविता ‘बस बचाए रखना उतनी ही धरती, जिस पर तुम्हारे पांव टिके हैं’, लब्धप्रतिष्ठित गीतकार दिनेश सिंदल ने सकारात्मक सोच को समर्पित कविता ‘कोई मेरी राहों में जब शूल बनाता चला गया, मैं पांवों को शूलों के अनुकूल बनाता चला गया’ तथा सैयद मुनव्वर अली ने गजल ‘दम तोड़ रहा है आज के इंसां का जमीर, उसे दौलत का रूप लगता सलोना है’ इत्यादि रचनाओं की प्रस्तुति दी। इसके अलावा गोष्ठी में पूर्णिमा जायसवाल ‘अदा’ ने एक औरत ने हमको क्या क्या दिया, सोचती हूँ कि हमने उसे क्या दिया, अशफाक अहमद फौजदार ने ‘हम तो इश्क को रूसवा होने नहीं देते’, श्याम गुप्ता शांत ने ‘माँ आखिर तुम चली गई’ तथा रजा मोहम्मद खान ने चैन दिल का तलाश करता हूँ, कोई अपना तलाश करता हूँ इत्यादि काव्य रचनाएं पेश कर खूब दाद बटोरी। 

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