विद्यालयों में नही पहुंची राशि, सरकार ने मांगा उपयागिता प्रमाण पत्र
सिरोही, 7 अप्रैल। शिक्षा विभाग ने पहले तो वार्षिकोत्सव की राशि स्वीकृति किये बिना विद्यालयों में वार्षिक उत्सव मनाने जाने हेतु आदेशित किया। सरकार ने अब तक पैसों का पुरा भुगतान भी नही किया। अब संस्था प्रधानों को भुगतना गले पड सकता। स्कूल शिक्षा परिषद के निर्देशानुसार विभागीय स्वीकृति के साथ ही राजकीय उच्च प्राथमिक, माध्यमिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आनन फानन में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम गत माह में आयोजित किये गये थे। उक्त कार्यक्रमों हेतु विभाग द्वारा चयनित विद्यालयों हेतु प्रति विद्यालय दस हजार की राशि देने की घोषणा की गयी थी। उसी अनुरूप विद्यालय प्रशासन द्वारा विभागीय दबाव तथा विभाग द्वारा स्वीकृति राशि आने की आस में निर्धारित घोषणा अनुसार व्यय भी कर दिया गया। उक्त कार्यक्रम हेतु जारी वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति राशि में अब कटौती किये जाने के विरोध में राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने मुख्यमंत्री शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजकर संशोधित वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जारी करवाने की मांग की है। संगठन ने भेजे ज्ञापन में कहा है कि संस्था प्रधानों के समक्ष अनुचित आर्थिक भार डाला जाना न्यायोचित नहीं है। विभाग द्वारा की गयी घोषणा एवं जारी प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति में अन्तर आना खेदजनक विषय है। बिना राशि हस्तान्तरण के उपयोगिता प्रमाण पत्र माँगा जाना विभागीय परम्परा सी बन गयी है जिस पर रोक लगनी चाहिए तथा साथ ही पूर्व प्रावधानानुसार ही विद्यालयों को राशि का आवंटन किया जाना चाहिए। शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशमंत्री रवि आचार्य तथा वरिष्ठ शिक्षक नेता गोपालसिंह ने बताया कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा प्रत्येक चयनित विद्यालय हेतु दस हजार की स्वीकृति जारी की गयी थी, परन्तु वर्तमान में विभाग द्वारा जारी वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति में माध्यमिक विद्यालयों के लिए स्वीकृत राशि में कटौती की गयी है। बड़ी रोचक बात यह है कि विभाग द्वारा विद्यालयों में राशि हस्तान्तरित किये बिना ही वार्षिकोत्सव के नाम पर खर्च राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र भिजवाये जाने के निर्देश संबंधितो को जारी किये गये है। संस्था प्रधानो द्वारा विभागीय निर्देशो की पालना करना अब भारी पड़ रहा है क्योंकि कार्यक्रम के आयोजन विभाग द्वारा तय मापदण्डो के अनुसार किये गये थे। कार्यक्रम में भामाशाह, पूर्व छात्र, शिक्षक सम्मान के साथ साथ अनेकानेक प्रतियोगिता में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियो को सम्मान हेतु विभिन्न प्रकार के स्मृति चिन्ह, स्वागत सत्कार, सांस्कृतिक कार्यक्रम इत्यादि आयोजित किये गये। जिसमें व्यय किया गया। उक्त कार्यक्रम मद में राशि की कटौती करना संस्था प्रधानो की जेब पर भार डालने वाला निर्णय है जो अनुचित है।