टीएसपी क्षेत्र में जाने वालों की सूची तैयार कर काउंसलिंग के निर्देश स्वागत योग्य: गहलोत
सिरोही (जयन्तिलाल दाणा)। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर सौरभ स्वामी ने सिरोही, पाली, राजसमंद, चितौडगढ, उदयपुर, बांसवाडा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ के जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय प्रारंभिक शिक्षा को अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत गैर अनुसूचित क्षेत्र के मूल निवासी अध्यापक जो टीएसपी क्षेत्र से नॉन टीएसपी क्षेत्र में जाना चाहते हैं उन अध्यापकों की समेकित सूचना अविलम्ब तैयार करने के निर्देश पर राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने प्रतिक्रिया व्यक्त कर अविलम्ब काउंसलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ करने पर संगठन ने शिक्षक हित में राज्य सरकार का स्वागत योग्य कदम बताया। संघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने बताया कि कई वर्षों से टीएसपी से नॉन टीएसपी में विकल्प पत्र के आधार पर बाहर भेजने की मांग संगठन द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, निदेशक, सीडीईओ, डीईओ को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद पहली बार राज्य की गहलोत सरकार की प्रभावी मॉनिटरिंग कर तत्काल शिक्षक हित में लिए निर्णय पर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर सौरभ स्वामी ने 18 मार्च 2021 के द्वारा टीएसपी क्षेत्र के जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय प्रारंभिक शिक्षा को पत्र प्रेषित कर निर्देशित किया हैं कि टीएसपी क्षेत्र से नॉन-टीएसपी क्षेत्र में पदस्थापन हेतु समुचित प्रसार-प्रचार करते हुए सूची तैयार कर निदेशालय से अनुमोदन उपरांत ही टीएसपी क्षेत्र से नॉन-टीएसपी क्षेत्र में पदस्थापन हेतु कॉउंसलिंग की कार्यवाही करवाने के निर्देश दिए। कार्मिक विभाग के परिपत्र गत 16 जुलाई 2018 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में विभिन्न विभाग के अधिन सृजित पदों पर कार्यरत, पदस्थापित अधिनस्थ शिक्षकों के साथ ही मंत्रालयिक कर्मचारी, अधिनस्थ कार्मिकों तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को उनके नियोक्ता प्राधिकारी द्वारा एक माह की अवधि के भीतर इस आशय का विकल्प पत्र लिया जाये कि वे टीएसपी क्षेत्र में रहना चाहते हैं अथवा बाहर जाना चाहते हैं। परिपत्र जारी होने की एक माह की अवधि के भीतर यह कार्य पुर्ण करना था। वहीं उक्त अधिसूचित क्षेत्र की रिक्तियों के विरुद्ध नॉन-टीएसपी कार्यरत होने से स्थानीय अधिनिवासी अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अधिसूचित के निवासियों के आरक्षण, अन्य संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है एवं भविष्य में होने वाली भर्तियों में भी पद भरे हुए होने से अधिसूचित क्षेत्र के लाभ से अधिनिवासी वंचित हो रहे हैं जो किसी भी स्थिति में न्यायोचित नहीं हैं।