मरु महोत्सव की बदौलत हस्तशिल्पियों और लोक कलाकारों मिला प्रोत्साहन-सम्बल

जैसलमेर। मरु संस्कृति और लोक जीवन को रूपायित करने वाला मरु महोत्सव अबकि बार कई नए रंगों और रसों से भरा रहने के साथ ही नए कलेवर और नवीन आयोजनों की वजह से न केवल बहुआयामी बल्कि बहुद्देशीय भी रहा। खासकर लोककलाओं और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन की दिशा में अबकि बार मरु महोत्सव न केवल उपलब्धियों से भरा रहा बल्कि नई आशा और विश्वास जगाने वाला भी रहा। इस बार जिला कलक्टर आशीष मोदी की पहल पर शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल गड़ीसर झील के मुहाने मरु महोत्सवी बाजार सजा। इसमें विभिन्न स्थानों से आए हस्तशिल्पियों, हस्तकला विशेषज्ञों ने अपने तथा अपने क्षेत्र के हस्तशिल्प उत्पादों का दिग्दर्शन कराया और उत्पादों के विक्रय की सुविधा पायी। इसी प्रकार लोक कलाओं से संबंधित विधाओं के परम्परागत लोक कलाकारों ने अपने लोक वाद्यों का परिचय कराते हुए संगीतमय प्रस्तुतियों का परिचय कराया।

*सबको भाया राजस्थानी कला का प्रदर्शन*

हस्तशिल्प के विभिन्न तरह के उत्पादों को लेकर जयपुर से आई मनीषा पाण्डेय का स्टॉल आकर्षण का केन्द्र रहा, जहाँ एमएसएमई से मान्यता जयपुरी सामान नाम से राजस्थानी कला का प्रदर्शन किया, जिसमें लाईव ब्लॉक प्रिन्टिंग खास आकर्षण जगाने वाली रही। मरु महोत्सव में पहली बार अपनी कलाओंं व उत्पादों को लेकर आई मनीषा बताती हैं कि महोत्सव के अन्तर्गत गड़ीसर में मौका देने के लिए वे महोत्सव के जिला प्रभारी अशोक कुमार, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक हरीश व्यास तथा राजस्थान पर्यटन विभाग की आभारी हैं, जिन्होंने मौका देकर डाइंग, कशीदाकारी, हैण्ड प्रिंटिंग, गोटे का काम इत्यादि मुख्य कार्यों में जुटे हमारे कारीगरों को प्रोत्साहित किया।

*ऑन लाईन प्रदर्शन-विपणन के लिए प्रयास*

जयपुरी सामान नाम से उनके द्वारा कपड़ों की प्रिंटिंग, डिजाईन, ब्लॉक प्रिंटिंग, सिलाई का काम पिछले 8 वर्षों से किया जा रहा है। वे कहती हैं कि हमारी कोशिश है कि हमारी वैबसाईट द्वारा हैण्डीक्राफ्ट व्यापार को बढ़ावा मिले, ताकि राजस्थान के हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित सामान देश-विदेश में पसंद किया जा सके और उनको प्रोत्साहन मिले। मनीषा बताती हैं कि हम कई वर्षों से सांगानेर और बगरु हस्तकला (इलू छीपा), भगवती हैंड प्रिंट्स के अजय छीपा एवं बाड़मेर के राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता विश्वविख्यात राणमल खत्री के सहयोग और मार्गदर्शन से यहाँ तक पहुंच पाए हैं और अब जैसलमेर के हस्तशिल्पियों को आगे लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास शुरू कर रहे हैं।

*कला और कलात्मक उत्पादों का संसार*

गडीसर के मुहाने विभिन्न विधाओं के चितेरों, हस्तशिल्पियोंं और लोक कलाकारों का मिला-जुला संसार 4 दिन तक कद्रदानों के लिए इन प्रवृत्तियों और सृजन को करीब से देखने को मिला। बाहर से आए सैलानियों ने भी जी भर कर इन्हें देखा और सराहा। इस दौरान पोकरण की चित्रकार सुमन राठौड़ द्वारा स्थापित आर्ट कॉर्नर पर कैनवास व पेपर पर एक्रेलिक रंगों का संसार और विभिन्न चित्रकृतियां सैलानियों के मन में रच-बस गई। इसी प्रकार पोकरण के मृण कलाकारों द्वारा मिट्टी के बरतन व खिलौने, रूपकिशोर सोनी द्वारा सिल्वर ज्वेलरी, चांदी की गणेश जी मूर्ति आदि मूर्तियों का सृजन, तुलछाराम, दीपाराम, सगताराम व धूड़ाराम द्वारा हाथ से बनी हुई बरड़ी, पट्टू व शॉल आदि के स्टॉल पर महोत्सव में आए लोगों का तांता बंधा रहा। गड़ीसर की सजी-धजी छत्रियों में लोक कलाकारों द्वारा विभिन्न लोक वा़़द्यों के वादन और गायन ने हर किसी को मोहित किए रखा। खासकर मोहनलाल लुहार, सांगाराम, भवानी आदि के द्वारा अलगोजा, मोरचंग, काँगसिया आदि का वादन करते हुए सांगीतिक प्रस्तुतियों को सुनने लोगों का जमघट लगा रहा। कठपुतली कलाकार विनोद भट्ट, करसूल खान आदि ने कठपुतली द्वारा मरुस्थलीय लोक संस्कृति, परम्पराओं, रोचक कथानकों आदि का प्रदर्शन कर मन मोहा। गड़ीसर पर इस मिले-जुले मिनी बाजार को देखने तथा कलाकारों एवं हस्तशिल्पियों के सृजन को मोबाईल में कैद करने और सेल्फियां लेने वालों की भीड़ देर रात तक देखी गई।

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Gulam Mohammed

(EDITOR SEVA BHARATI NEWS) ==> Seva Bharti News Paper Approved Journalist, Directorate of Information and Public Relations, Rajasthan, Jaipur (Raj.), Mobile 7014161119 More »

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