ख़ुशदिलान-ए-जोधपुर की काव्य गोष्ठी में वीर रस बरसा

सेवा भारती समाचार।

जोधपुर। विजयदशमी के अवसर पर ख़ुशदिलान-ए-जोधपुर की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन व्हॉट्सअप समूह पर किया गया। इसमें संस्था सदस्यों सहित देश के 10 रचनाकारों ने ऑनलाइन काव्य पाठ करते हुए देश भक्तिपूर्ण रचनाएं पढ़ी। गोष्ठी के मुख्य अतिथि भीलवाड़ा के कवि योगेन्द्र शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि उज्जैन के शाइर मुनव्वर अली ‘ताज’ थे। अध्यक्षता सहाड़ा के कवि अक्षयराज सिंह झाला ने की। संचालन संस्था के महासचिव अनिल अनवर ने किया। गोष्ठी का शुभारम्भ कवि परशुराम दवे ‘कुसुम‘ ने महाराणा प्रताप की वीरता के वर्णन पर रचित राजस्थानी कविता से किया। उन की इन पंक्तियों पर श्रोताओं का बहुत प्यार मिला। उन के पश्चात काव्य पाठ करने पधारी विजय बाली ने करगिल युद्ध में भारतीय सेना के शौर्य पर रचित राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत कविता पढ़ी जिस की पंक्ति सारा भारत अर्जुन है बना, मछली की आँख बना करगिल श्रोताओं में वीरता का भाव जागृत कर गई।
गोष्ठी में तीसरे क्रम पर काव्य-पाठ कर रहे कवि शशि कुमार बिड़ला ने किसी अज्ञात रचनाकार की बहुश्रुत रचना राष्ट्र की जय चेतना का गान वन्दे मातरम का सस्वर पाठ किया। लीला कृपलानी ने देश के युवाओं को सम्बोधित करते हुए अपनी आह्वान शीर्षक काव्य रचना में उन का आह्वान करते हुए युवाओ! चल पड़ो तुम अब, यह पग बढ़ाने का समय है पंक्तियां पढ़ी। अगले क्रम में महेन्द्र सिंह परिहार ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध काव्य कृति रश्मिरथी के द्वितीय सर्ग के काव्यांश का वाचन किया। कवि विमल कान्त वर्मा ने अपनी कविता ,आहट युद्ध की, शीर्षक से पढ़ी जिस में भारतीय सेना व जनता को सम्भावित तीसरे विश्वयुद्ध के लिए कमर कस कर तैयार रहने के लिए चेताया।
सातवें क्रम पर काव्य पाठ करते हुए संस्था के महासचिव अनिल अनवर ने देश की सीमाओं को सम्बोधित करती अपनी प्रसिद्ध उर्दू नज़्म सरहदे-मुल्क से खि़ताब पढ़ी। विशिष्ट अतिथि रचनाकार के रूप में सुप्रसिद्ध शाइर मुनव्वर अली ताज की देशभक्तिपूर्ण गज़़ल दर्शकों द्वारा बहुत पसन्द की गई। मुख्य अतिथि के रूप में काव्य योगेन्द्र शर्मा ने अपने काव्य पाठ के दो वीडियोज़ दर्शकों के लिए गोष्ठी में भेजे। प्रथम काव्य पाठ लोक सभा टीवी पर 5 अगस्त को भी इसी वर्ष प्रसारित हुआ था। द्वितीय वीडियो में चीन को ललकारते हुए जब उन्होंने निम्न पंक्तियां पढ़ी तो सभी दर्शक रोमांच से भर उठे।
गोष्ठी में अन्त में काव्यपाठ करते हुए मेवाड़ अंचल के सहाड़ा के सुकवि अक्षय राज सिंह झाला ने विश्व के इतिहास में अद्वितीय बलिदान प्रसंग पन्ना धाय द्वारा अपने पुत्र की मातृभूमि की बलिवेदी पर न्यौछावर करने की घटना की अपनी कविता स्वर्णाक्षर में लिखी कहानी चंदन के बलिदान की प्रस्तुति कर के दर्शकों को रोमांच से भर दिया। इस प्रकार ख़ुशदिलान-ए-जोधपुर की गोष्ठी में कवियों की वीर रस की ओजस्वी कविताओं ने विजय पर्व विजय दशमी को सार्थक बना दिया।

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Gulam Mohammed

(EDITOR SEVA BHARATI NEWS) ==> Seva Bharti News Paper Approved Journalist, Directorate of Information and Public Relations, Rajasthan, Jaipur (Raj.), Mobile 7014161119 More »

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