शिव का अग्नि नेत्र प्रतीक है ब्रह्म दर्शन द्वारा श्रेष्ठ चरित्र को पाने का

जोधपुर। चौपासनी गार्डन जोधपुर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से किए जा रहे सात दिवसीय शिव कथा अमृत आयोजन में माता पार्वती जन्म उत्सव को बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। दीप प्रज्वलन के लिए ब्रिगेडियर एन एम सिंघवी, ग्रुप कैप्टन मोहनलाल गहलोत, भवानी सिंह राठौर ( सरपंच– देचू एवम् राष्ट्र उपाध्यक्ष सरपंच संघ), प्रोफेसर शेर सिंह गहलोत (MBM विश्वविद्यालय), जसवंत सिंह इंदा (भाजपा जिला महामंत्री उत्तर), प्रीतम शर्मा (पार्षद), गिरिधारी सिंह (केतु पार्षद), सुमन सैन(पार्षद) अतिथिगण पधारे थे|

महाराज हिमवान व महारानी मैना ने  आदिशक्ति जगदंबिका की आराधना कर उन्हें पुत्री स्वरूप में पाने का वरदान मांगा। माता सती पूर्व जन्म में देह त्याग से पहले भगवान शिव से यह प्रार्थना करती हैं कि मैं अगले जन्म आपकी ही सेविका बनकर जन्म लूं। उसी प्रार्थना के फल स्वरुप माता सती पार्वती के रूप में महाराज हिमवान के घर कन्या के रूप में जन्म लेकर आई। हिमवान महाराज ने पुत्री के जन्म की खुशी में असंख्य गायों का दान किया। हमारी भारतीय संस्कृति में प्रत्येक खुशी के अवसर पर गोदान की परंपरा रही है। गोदान से बढ़कर और कोई भी उत्तम दान नहीं कहा जाता है। क्योंकि जो भारतीय नस्ल की देसी गाय हैं वह गोवंश धरा का सबसे अमूल्य धन है। इसीलिए प्राचीन समय में विवाह शादी में दहेज के रूप में गौ माता को देने की प्रथा थी। यज्ञ के अंदर यजमान यज्ञकर्ता को गाय दान किया करते थे।

विद्यार्थी गुरु को दक्षिणा के स्वरूप में गाय दिया करते थे। भारतीय नस्ल की जो देसी गाय हैं वह भारत देश की आर्थिक समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, कृषि में अन उत्पादन, मानव के स्वास्थ्य रक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसीलिए संत अरविंदु जी कहते हैं कि गाय अर्थ, धर्म, काम ,मोक्ष इन समस्त पदार्थों को प्रदान करने वाली कामधेनु के समान है। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से कामधेनु प्रकल्प देसी गाय के संवर्धन व संरक्षण के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। संस्थान की कामधेनु गौशाला को उत्तर भारत की नंबर 1 गौशाला के पुरुस्कार से भारत सरकार ने सम्मानित किया है।
            भगवान शिव के द्वारा की गई कामदहन की लीला आज युवाओं के मन में उठने वाली काम–वासनाओं को मिटाकर एक चरित्रवान व्यक्तित्व को प्राप्त करने के लिए संकेत करती हैं। आज वासनाओं के कारण हमारे समाज में नारी शोषण के जैसी घटनाओं का स्तर बढ़ता चला जा रहा है । सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ब्रह्म ज्ञान को प्रदान कर भगवान शिव के समान दोनों आंखों के मध्य भृकुटी में स्थित युवाओं के आग्नि नेत्र को उजागर कर उनके भीतर उठने वाले इन वासनाओं के ऊपर अंकुश लगाने का कार्य कर रहे हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के युवा परिवार सेवा समिति के नाम से चल रहे युवा संगठन में परिवर्तित हो चुके युवाओ के द्वारा नुक्कड़ नाटक व रैली के माध्यम से देश के कई क्षेत्रों में इन अश्लील अभद्र गानों को बंद करवाने के लिए मुहिम चलाई गई। नशा मुक्त करने के लिए बोध नामक प्रकल्प चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है नशा उन्मूलन। युवा परिवार सेवा समिति के सदस्य आज समाज के कोने कोने में फैले नशे रूपी बुराई को मिटाने के लिए प्रयासरत हैं।

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