रमजान का महीना बड़ी बरकतों का है : हजरत सूफी शाह मोइनुद्दीन जिलानी
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। रमजान का महीना मोमिनों के लिए अजमत, रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है । इस बार यह महीना अलग माहौल में आया है। दुनिया को कोरोनावायरस ने जकड़ रखा है और सभी लोग अपने ही घरों में हैं। इस बार सभी इबादत घर में रहकर ही अदा करनी होगी।
इस महीने में कुरान नाजिल हुआ है । इस महीने में की गई इबादत का सवाब आम दिनों के मुकाबले 70 गुना ज्यादा मिलता है । एक नेकी के बदले 70 नेकी मिलती है। इस महीने मैं रोजा रखकर सिर्फ भूखा रहना ही नहीं है बल्कि रोजे का असल मकसद जिस्म के हर अंग का रोजा है जैसे कि जुबान से कोई गलत बात नहीं बोलना गलत बात नहीं सुनना गलत नजर नहीं डालना जिस्म को साफ सुथरा रखना वक्त पर नमाज पढऩा असल रोजा है। परवरदिगार आलम के लिए अपने सारी इच्छाओं का त्याग करना ही रोजा है।
लोक डाउन के आलम में हम अपने इबादत निजी स्तर पर ही करें । कहीं भी सामूहिक रूप से जमा ना हो। रोजा, इफ्तार तरावीह इत्यादि सारे आमाल इबादत है घर पर ही किया जाए। रोजा हर इंसान औरत मर्द पर फर्ज है । सच्चा इंसान सच्चे दिल से तौबा करता है तो इस महीने में अल्लाह उसके गुनाहों को बक्श देता है और वह जन्नत का हकदार हो सकता है। उस परवरदिगार आलम की बारगाह में खूब रो रो कर दुआ करें ताकि वह राजी हो जाए सिर्फ अपने व अपने वतन के लिए ही नहीं बल्कि सारी दुनिया के लिए खैरों आफियत मांगी जाए कि अल्लाह ताला इस मुबारक महीने के सदके में इस महामारी के प्रकोप से इस दुनिया को बचा ले। आमीन
– हजरत सूफी शाह मोइनुद्दीन जिलानी, मो. 9829436010
सज्जादा नशीन दरबारे बिस्मिल सीकर राजस्थान