‘गांधी साहित्य की वर्तमान संदर्भ में उपलब्धता एवं उपयोगिता‘ आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन
जोधपुर। ‘गांधी के विचारों का परिपेक्ष्य विश्वव्यापी हैं। मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के जीवन में क्रांति का सूत्रपात गांधी दर्शन से हुआ। झूकूंगा नहीं लेकिन अहिंसात्मक प्रतिरोध करता रहूंगा। यही गांधी का मार्ग हैं।‘ यह विचार जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 के0एल0 श्रीवास्तव ने गांधी भवन में ‘गांधी साहित्य की उपलब्धता एवं उपयोगिता‘ विषय पर गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, राजस्थान साहित्य अकादमी एवं अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में व्यक्त किये। प्रो0 श्रीवास्तव ने कहा कि नई पीढ़ी को गांधी दर्शन से परिचित करवाने का कार्य प्राथमिकता से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांधी का स्मरण स्वाधीनता आंदोलन पवित्रता की याद दिलाता हैं। गांधी विचार में ही देश और विश्व का भविष्य हैं।
इस अवसर पर प्रख्यात शाइर एवं चिन्तक शीन काफ निजाम ने कहा कि मन से मानव बनना ही गांधी होना हैं। गांधी असंभव को संभव बनाने का नाम हैं। गांधी ने कोई नया दर्शन नहीं दिया। लेकिन पुराने सिद्धांतों को ही पुनः स्थापित करने का कार्य किया। निजाम ने कहा कि दीपक केवल प्रकाश को जानता हैं वह मंदिर – मस्जिद को नहीं जानता। उन्होंने कहा कि नंदकिशोर आचार्य जैसे राजस्थान के लेखक गांधी और अहिंसा दर्शन पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी हैं।
प्रथम तकनीकी सत्र में संतोष चौधरी ने ‘गांधी साहित्य/चिंतन/दर्शन की वर्तमान संदर्भ में उपयोगिता पर सारगर्भित पत्रवाचन किया। सत्र के मुख्य अतिथि प्रो0 कौशलनाथ उपाध्याय एवं अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ0 आईदानसिंह भाटी ने की। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 संध्या शुक्ला ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डाॅ0 वीणा चूण्डावत ने ‘गांधी साहित्य की सुन्दरता‘ विषय पर सारगर्भित पत्रवाचन किया। सत्र के मुख्य अतिथि डाॅ0 गजेसिंह राजपुरोहित एवं अध्यक्षता कवियित्री एवं आलोचक प्रो0 सरोज कौशल ने की। सत्र का संचालन मंजू शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में गांधी बधिर विद्यालय माता का थान, नाकोड़ा पाश्र्वनाथ महाविद्यालय, सरस्वती बाल वीणा भारती स्कूल सूरसागर, रा0 उ0 प्रा0 वि0 मसूरियां एवं डाॅ0 पदमचंद बिलमकंवर गांधी रा0 मा0 वि0 रेजीडेंसी के विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। समारोह में मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष रमेश बोराणा, मीठेश निर्मोही, कालूराम प्रजापत, धर्मेश-सरोज रूटिया, डाॅ0 कमल मोहनोत, गीता-हेना भट्टाचार्या, भूमेश्वरनाथ व्यास, राजेंद्रसिंह गहलोत, हेमा शर्मा, राकेश गांधी, कैलाश टाटिया, गिरधरलाल मूंदडा, राजकुमार जैन, योगिता शर्मा, डाॅ0 शैलेष यादव, डाॅ0 शैला माहेश्वरी, डाॅ0 हरिदास व्यास, ब्रह्मसिंह चैहान, डाॅ0 रश्मि राठी, डाॅ0 संदीप कुमार, डाॅ0 हरप्रसाद राॅय, पूर्व पार्षद ओमकार वमार्, गांधी एवं अहिंसा दर्शन ग्रामीण के बलदेव बेनिवाल एवं युवाओं सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इस अवसर पर बादलराज सिंघवी को सूत की माला एवं शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक डाॅ0 भावेंद्र शरद जैन ने सभी के प्रति अपना आभार ज्ञापित किया।