राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई
सेवा भारती समाचार
जोधपुर। मुक्ति संस्था बीकानेर के तत्वावधान में पांचवी राजस्थानी राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन जूम ऐप्प पर किया गया। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रख्यात रंगधर्मी एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कवि व कथाकार राजेन्द्र जोशी ने की। कार्यक्रम संयोजक जयपुर की युवा साहित्यकार कविता मुखर एवं कार्यक्रम समन्वयक साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने बताया कि राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में राजस्थानी भाषा के युवा कवि और जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में प्राध्यापक डॉ गजेसिंह राजपुरोहित, बीकानेर के प्रतिष्ठित गीतकार राजेन्द्र स्वर्णकार, शाहपुरा भीलवाड़ा के मंचीय कवि कैलाश मण्डेला और ऋषभदेव उदयपुर के भविष्य दत्त भविष्य ने राजस्थानी भाषा में काव्य पाठ किया। राजस्थानी काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रख्यात रंगधर्मी एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने कहा कि राजस्थानी भाषा दुनिया की समृद्ध भाषाओं में अपना प्रमुख स्थान रखती है और इसके बोलने वाले लगभग सभी देशों में मौजूद हैं,लेकिन दुर्भाग्य से इसे संवैधानिक मान्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि लगभग दस करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को अविलम्ब संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जानी चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि राजस्थानी भाषा के इस कार्यक्रम को राजस्थान और पूरे देश के लोगों का सर्मथन मिल रहा है, उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार और जुड़ाव ही राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के अन्त में कार्यक्रम समन्वयक साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।