प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में नहीं होगा जाति का उल्लेख
- क्राइम रिपोर्टर एस.कुमार जोधपुर।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट और प्रदेश के सभी अधीनस्थ न्यायालयों में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में किसी भी व्यक्ति की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जाति के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान असंवैधानिक है। यह भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। अपने आदेश में उन्होंने कहा है कि भविष्य में किसी की जाति का उल्लेख नहीं किया जाए। इस संदर्भ में उन्होंने जुलाई 2018 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसपी शर्मा के एक फैसले का भी उल्लेख किया है।बता दे कि जुलाई 2018 में अलवर जेल में बंद बिशन ने हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में एक जमानत याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया। जमानत आदेश जब अधीनस्थ न्यायालय पहुंचा तो वहां से उसे रिहा करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया। इसका कारण बताते हुए कहा गया कि कोर्ट ने अपने आदेश में बिशन मेव लिखा है, जबकि जमानत मांगने वाले की जाति जाटव है। ऐसे में उसे रिहा नहीं किया जा सकता। इस पर बिशन एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण में पहुंचा। इस पर न्यायाधीश एसपी शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि जाति किसी की पहचान का आधार नहीं हो सकता। व्यक्ति की पहचान उसके पितृत्व के आधार पर होनी चाहिये ना कि जाति के आधार पर। उन्होंने अपने आदेश में साफ लिखा कि भविष्य में पुलिस भी किसी आरोपी की जाति का उल्लेख नहीं करे लेकिन इस आदेश की पालना राजस्थान में शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में रजिस्ट्रार जनरल ने एक बार फिर आदेश जारी किया है।