गौ माता को पशु रक्षकों ने अपनी जान को जोखिम में रखकर गौ माता की जान बचाई

सिरोही । सिरोही स्थित अरावली पर्वतमाला की श्रंखला के पहाड़ पर मातर माताजी मंदिर के समीप 800 मीटर पहाड़ की ऊंचाई पर गाय और बछड़ा अनजाने में चारा खाने की तलाश में पहाड़ पर चढ़ गई । दो दिन से वहां पर गाय व बछड़ा भूखा प्यासा रहा । लोगों ने गाय व बछड़े को बचाने की पीएफए की हेल्प लाइन पर सूचना दी । संस्था  के कार्यकर्ताओं ने पहाड़ पर चढ़कर गाय और बछड़े को वहां देखा लेकिन नीचे उतारने के लिए बड़ा जोखिम भरा काम था । क्योंकि पहाड़ पर गेहरा पथरीला झरना होने से और रिमझिम बारिश होने से गाय व बछड़ा  झरने में गिरने की पूरी संभावना हो सकती थी । हमारे पास में संसाधन की कमी होने से या किसी प्रकार से हेलीकॉप्टर की  सुविधा नहीं होने से इस पुनीत कार्य को अंजाम देना संभव नहीं था फिर भी गाय को बचाने के लिए संस्था के सचिव अमित दियोल के नेतृत्व में पीएफए के स्टाफ, चिकित्सा टीम एवं कार्यकर्ताओं की एक मीटिंग बुलाकर प्लानिंग बनाई ।और उस प्लानिंग के तहत पर गाय को किस भी तरह से सुरक्षित रहते हुए नीचे उतारा जाए । उस गाय को किसी प्रकार से झरने में गिरने से बचाया जाए या बेमौत मरने नहीं दिया जाये । हमने मैप बनाकर रूट चार्ट के सहारे इस कार्य को अंजाम देने की रूपरेखा तैयार की गई ।  6 लोगों की टीम, चिकित्सा टीम एवं हेल्परों की सेवा लेकर  गाय के गर्दन पर  और कमर पर रस्सी बांध कर धीरे-धीरे स्टेप बाय स्टेप चलते हुए एवं जाने का रास्ता बनाकर सुरक्षित नीचे उतारने  में सफलता पाई । पहले गाय को सुरक्षित हमने नीचे उतारा । दो जगह पर गाय नीचे भी गिर गई तथा उसके पैरों पर चोट भी लगी फिर भी वापस उसको हमारी टीम ने उठाकर गाय को गुड , चारा, मिनरल मिक्सर देकर और गौ माता का झंकारा बोलते हुए और ईश्वर की असीम कृपा से नीचे उतारने में सफलता पाई । हमारी टीम ने दूसरे दौर में गाय के बछड़े को धीरे-धीरे पहाड़ से नीचे उतारने के लिए कोशिश की परंतु बछड़ा कॉफी थक चुका था ऐसी परिस्थिति में हमारी टीम ने बछड़ों को लिफ्टिंग दी और अल्प विराम भी करवाते रहे जिससे बछड़ा निर्दोष होकर बेझिझक नीचे उतरने में सफल हो गया । मैं संस्था की ओर से इस जोखिम भरे काम को अंजाम देने के लिए हमारे ईमानदार एवं कर्तव्य निष्ठ स्टॉफ, कार्यकर्ता एवं टीम प्लानिंग के प्रबंधक मयूर त्रिवेदी इत्यादि को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं ‌। और मैं इनसे उम्मीद करता हूं कि इसी तरह का संहयोग हमारी संस्था पीएफए को मिलता रहेगा।

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