सरगरा समाज ने किया जिला मुख्यालय का घेराव
- नाबालिग याना को न्याय दिलाने की मांग, - जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
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सिरोही, जयन्ति लाल दाणा।
नागलिग याना कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच करवाने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं विसरा जांच की समीक्षा कराने तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने को लेकर शनिवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश महासचिव मोतीलाल हिरागर के नेतृत्व में समस्त सरगरा समाज ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जिला मुख्यालय का घेराव कर पुलिस अधीक्षक, थाना अधिकारी एवं राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने ज्ञापन में बताया कि 13 वर्षीय नाबालिग बालिका याना कुमारी पुत्री रमेश कुमार, निवासी झुपाघाट, सिरोही (वर्तमान पता डाबी लाइन, सिरोही) की दिनांक 05 अक्टूबर 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होने का गंभीर मामला सामने आया। इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। नाबालिग बालिका की मृत्यु के वास्तविक कारणों का निष्पक्ष रूप से पता लगाना तथा परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
है। -
थाने में किया अप्राकृतिक मृत्यु का पंजीकरण
ज्ञापन में उन्होने बताया कि प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पुलिस थाना सिरोही में दिनांक 05.10.2026 को अप्राकृतिक मृत्यु का पंजीकरण किया गया है, जिसका यू.डी. नंबर 0012/2026 अंकित है। इसके अतिरिक्त, राजकीय जिला अस्पताल, सिरोही की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु को फांसी से संबंधित बताया गया है। रिपोर्ट में गर्दन पर लाल-भूरे रंग का लिगेचर मार्क, श्वास नली की सामने वाली दीवार पर दबाव तथा अन्य आंतरिक अंगों को स्थिति का विवरण दर्ज है।
नमूने परीक्षण हेतु सुरक्षित किए जाने का भी उल्लेख
ज्ञापन में यह भी बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान पेट की सामग्री, रक्त, हृदय तथा अन्य अंगों के नमूने रासायनिक परीक्षण के लिए सुरक्षित किए जाने का भी उल्लेख है। इसलिए आवश्यक है कि इन सभी तथ्यों की विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय एवं वैज्ञानिक जांच के आधार पर समीक्षा की जाए, ताकि मृत्यु से संबंधित प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू स्पष्ट हो सके।
साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन किया जाना न्यायहित में आवश्यक
उन्होंने ज्ञापन में यह भी बताया कि मृतका की कम उम्र तथा घटना की गंभीरता को देखते हुए परिवार की आशंकाओं का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना आवश्यक है। किसी भी संभावित प्रताड़ना, धमकी या अन्य संदिग्ध परिस्थिति के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच होनी चाहिए। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी परिस्थितियों, चिकित्सकीय निष्कर्षों और वैज्ञानिक साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन किया जाना न्यायहित में आवश्यक है।
यह रखी निष्पक्ष जांच और प्रमुख मांगे
ज्ञापन में इन्होंने उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच किसी सक्षम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में करवाई जाने व आवश्यकता अनुसार स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की व्यवस्था की जाए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विशेषज्ञ समीक्षा रिपोर्ट में दर्ज गर्दन के लिगेचर मार्क, उसके स्वरूप एवं दिशा, श्वासनली पर दबाव और अन्य निष्कर्षो की विशेषज्ञ चिकित्सकीय समीक्षा करवाई जाकर आवश्यक होने पर मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए तथा पोस्ट मार्टम के दौरान सुरक्षित किए गए विसरा, रक्त तथा अन्य नमूनों को नियमानुसार एफएसएल संबंधित प्रयोगशाला में भेजकर जांच करवाई जाए एवं रिपोर्ट प्राप्त होने पर उसे जांच के समग्र निष्कर्षो के साथ जोड़ा जाए।
सीसीटीवी फुटेज की जांच करवाई जाए
उन्होंने यह भी मांग रखी की कि घटनास्थल का निरीक्षण कर फंदे/रस्सी से संबंधित वस्तुओं, परिस्थिति जन्य साक्ष्यों, फोटो, वीडियो तथा उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच करवाई और सभी प्रासंगिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए व मृतका के परिवार, पड़ोसियों, मित्रों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों से नियमानुसार पूछताछ की जाए। यदि किसी प्रकार की प्रताड़ना, धमर्क, विवाद या संदिग्ध गतिविधि के साक्ष्य मिलते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच की जाकर संबंधित व्यक्तियों के प्रासंगिक कॉल रिकॉर्ड, संदेश और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाए, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का पता चल सके।
जांच से संबंधित रिकाॅर्ड को सुरक्षित रखा जाए
उन्होंने ज्ञापन में बताया कि साक्ष्यों का संरक्षण घटनास्थल से संबंधित वस्तुओं, पोस्टमार्टम अभिलेखा, पुलिस जांच के दस्तावेजों और वैज्ञानिक नमूनों की अभिरक्षा एवं हस्तांतरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्य नष्ट होने की आशंका न रहे तथा पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या प्रताड़ना से सुरक्षा प्रदान की जाए तथा उनके बयान निष्पक्ष वातावरण में दर्ज किए जाएं।
ज्ञापन में उन्होंने इस गंभीर प्रकरण को संवेदनशीलता से लेते हुए तत्काल उचित कार्रवाई कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच. घटनास्थल के साक्ष्य एवं घटना से पूर्व की परिस्थितियों का समग्र परीक्षण करवाकर मृत्यु की वास्तविकता के कारण स्पष्ट कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
इनकों भेजा ज्ञापन
उक्त ज्ञापन जिला कलेक्टर सहित पुलिस अधीक्षक सिरोही, थाना अधिकारी सिरोही एवं राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष के नाम भी ज्ञापन सौंपकर उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर न्याय ही गुहार लगाई है, ताकि दोषी बचें नहीं और कोई निर्दोष फंसे नहीं।