रमजान: रहमत, बरकत, मगफिरत और इंसानियत का पैग़ाम
मुफ्ती ए आजम राजस्थान मौलाना शेर मोहम्मद ख़ान रज़वी साहब से सेवा भारती सम्पादक गुलाम मोहम्मद से विशेष बातचीत
जोधपुर। मुक़द्दस माह-ए-रमजान की आमद पर आध्यात्मिक इस्लामिक संस्थान दारूल उलूम इस्हाकिया मुफ्ती ए आजम राजस्थान मौलाना शेर मोहम्मद ख़ान रज़वी ने तमाम अहले-वतन को दिली मुबारकबाद पेश की है। उन्होंने कहा कि रमजान इंसानियत, सब्र और तक़वा (परहेज़गारी) का महीना है, जो समाज में मुहब्बत, हमदर्दी और भाईचारे को मज़बूत करता है।
रमजान की आमद –
मौलाना रज़वी ने फरमाया कि रमजान की आमद मुसलमानों के लिए बड़ी सआदत (सौभाग्य) और रूहानी खुशी का मौक़ा है। यह महीना बंदे को अपने रब से करीब करता है और नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। रमजान की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों में इबादत का सिलसिला बढ़ जाता है और हर तरफ रूहानी माहौल बन जाता है।
रोज़े की फज़ीलत –
उन्होंने कहा कि रोज़ा इस्लाम के अहम अरकान में से एक है। रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास से रुकना नहीं, बल्कि अपनी ज़ुबान, निगाह और दिल को भी गुनाहों से बचाने का नाम है। रोज़ा इंसान को सब्र, आत्मसंयम और हमदर्दी की तालीम देता है। भूख-प्यास का एहसास ग़रीबों के दर्द को समझने में मदद करता है, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
तरावीह की बरकतें –
रमजान की रातों में अदा की जाने वाली तरावीह की नमाज़ खास अहमियत रखती है। मस्जिदों में पाक क़ुरआन की तिलावत के साथ तरावीह अदा की जाती है, जिससे ईमान में मजबूती और दिलों को सुकून मिलता है। तरावीह के जरिए मुसलमानों को क़ुरआन-ए-पाक सुनने और समझने का अवसर मिलता है, जो रूहानी तरक्की का जरिया है।
सामाजिक समरसता और भाईचारगी –
मौलाना रज़वी ने कहा कि रमजान सामाजिक समरसता, अमन-चौन और भाईचारे का पैग़ाम देता है। इफ्तार के मौक़े पर अमीर-ग़रीब, छोटे-बड़े सब एक साथ बैठते हैं, जो बराबरी और इंसानियत की मिसाल है। यह महीना नफ़रत को खत्म कर मोहब्बत और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने की तालीम देता है।
मस्जिदों में विशेष व्यवस्थाएँ –
रमजान के मद्देनज़र शहर की मस्जिदों में साफ-सफाई, रोशनी, वुज़ू के पानी, पंखों और नमाज़ियों की सुविधा हेतु विशेष इंतज़ामात किए गए हैं। तरावीह और जुमा की नमाज़ के दौरान अनुशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था का भी ध्यान रखा जा रहा है। कई मस्जिदों में सामूहिक इफ्तार की व्यवस्था भी की गई है, ताकि रोज़ेदारों को सहूलियत मिल सके।
अमन, शांति और सहयोग की अपील
अंत में मौलाना शेर मोहम्मद ख़ान रज़वी ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, जरूरतमंदों की मदद करें, ज़कात व सदक़ा अदा करें और शहर में अमन-ओ-अमान कायम रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि रमजान इंसान को बेहतर इंसान बनने और समाज को बेहतर बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।