कोटा – Sevabharati News https://sevabharati.co.in Latest News Channel Sat, 29 Jun 2024 05:35:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 https://sevabharati.co.in/wp-content/uploads/2020/12/seva-bhara-logo-new.jpg कोटा – Sevabharati News https://sevabharati.co.in 32 32 158664721 कोटा में बारिश के बीच सता रहा मगरमच्छ हादसे का डर https://sevabharati.co.in/archives/47336 https://sevabharati.co.in/archives/47336#respond Sat, 29 Jun 2024 05:03:48 +0000 http://www.sevabharati.co.in/?p=47336 आपकी गाड़ी के नीचे मगरमच्छ तो नहीं?

कोटा। राजस्थान के कोटा शहर में अगर आप रहते हैं तो बारिश के इस मौसम में जरा सावधान हो जाइए। कहीं आपकी कार के नीचे खूंखार मगरमच्छ तो आराम नहीं फरमा रहा है। क्योंकि मानसून सत्र के दौरान कोटा शहर में मगरमच्छ का डर सता रहा है। पिछले 2 दिन में चार मगरमच्छ कोटा शहर में नजर आए। तीन का वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया। उन्हें सुरक्षित वन विभाग के देवली अरब स्मृति वन तालाब में छोड़ा गया। एक रात के वक्त सड़क पर आया था, जो कोटा बैराज की राइट मैन कैनाल में उतर गया था। हाल ही में एक मल्टी स्टोरी कैंपस में मगरमच्छ के आने से हडकंप भी मचा।

खड़ी कारों के नीचे दौड़ा मगरमच्छ : कोटा शहर के बजरंग नगर इलाके और कोटा बैराज से निकलने वाली राइटमैन कैनाल के किनारे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के कैंपस में शुक्रवार को एक मगरमच्छ आ गया। मगरमच्छ एक कार के नीचे छिपा हुआ था। सुबह 4:30 बजे के आसपास मल्टी स्टोरी कैंपस की सुरक्षा में तैनात गार्ड ने मगरमच्छ को देखा। इसके बाद गार्ड ने सोसाइटी के पदाधिकारियों को इसकी सूचना दी। मौके पर वन विभाग की टीम को बुलाया गया। मगरमच्छ एक कार के टायर के पास छिपकर बैठा हुआ था। जैसे ही उस पर टाट की बोरी डाली तो मगरमच्छ कैंपस के अंदर खड़ी कारों के नीचे दौड़ गया। बड़ी मुश्किल से जाकर मगरमच्छ वन गर्मियों के हाथ लगा और उसे पकड़ा गया।


इतनी दूर आखिर कैसे आया मगरमच्छ: मगरमच्छ की लंबाई करीब 5 फीट के आसपास बताई जा रही है। मगरमच्छ कब मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की कैंपस में पहुंचा, कहां से आया किसी को इस बारे में कोई खबर नहीं है। लेकिन जब वह पकड़ में आया तो वहां रहने वाले लोगों के होश उड़ गए। लोगों का कहना था कि मगरमच्छ सवेरे के वक्त गार्ड को नजर आया। अगर मगरमच्छ रात के वक्त किसी पर हमला कर देता तो मामला भारी हो जाता। मल्टी स्टोरी में रहने वाले लोगों ने कहा कि संभव है, यह मगरमच्छ पास के नालों से यहां पहुंचा है। क्योंकि पास में ही होकर दाईं मुख्य नहर गुजर रही है। नहर के पास छोटे-छोटे दो-तीन तालाब हैं, जिनमें मगरमच्छ अक्सर नजर आते हैं।

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प्राइमरी शिक्षा नींव है, इसकी गुणवत्ता में सुधार के प्रयास करें: उपराष्ट्रपति https://sevabharati.co.in/archives/43633 https://sevabharati.co.in/archives/43633#respond Tue, 05 Sep 2023 19:09:05 +0000 http://www.sevabharati.co.in/?p=43633 लोगों से प्रभावित होकर या उनके दबाब में आकर नहीं – उपराष्ट्रपति की छात्रों को सलाह

अपनी रुचि और एप्टीट्यूड के अनुसार कैरियर चुनना चाहिए : उपराष्ट्रपति

कोटा। उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज अपनी कोटा यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस दौरान संसद में व्यवधानों को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी पंचायत संवाद और विचार-विमर्श का मंच होनी चाहिए ना कि शोर-शराबे और हंगामे का। उन्होंने आगे कहा कि “एक मुद्दा आया वन नेशन- वन इलेक्शन का। कह रहे हैं, हम चर्चा ही नहीं करेंगे! अरे चर्चा करना आपका काम है, उससे सहमत होना या ना होना आपका विवेक है।” श्री धनखड़ ने आगे कहा “लोकतंत्र में चर्चा नहीं होगी तो वह लोकतंत्र कहां है? लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आवश्यक है कि चर्चा और विमर्श हो।”

सरकारों द्वारा मुफ्त की रेवड़ियां बांटने को गलत प्रवृत्ति बताते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि हमारा जोर पूंजीगत व्यय (capital expenditure) पर अधिक होना चाहिए ताकि स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर बनायी जा सके। “ऐसा करने के बजाय यदि कोई सरकार लोगों की जेब गर्म करती है तो यह लाभ अल्पकालिक होगा, & इससे दीर्घकालिक नुकसान उठाने पड़ेंगे।”

भारतीय इतिहास पढ़ाने से संबंधित एक छात्र के प्रश्न के जवाब में उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि हर छात्र-छात्रा को इतिहास पढ़ना चाहिए भले ही उनके अध्ययन के विषय कुछ भी हों। इससे हमें हमारे स्वतंत्रता बलिदानियों के बारे में जानने को मिलता है। श्री धनखड़ ने आगे कहा कि अमृत काल में हमें अनेक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को जानने का अवसर मिला है।

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि प्राइमरी शिक्षा बच्चों का आधार तैयार करती है, अतः प्राइमरी एजुकेशन की गुणवत्ता सुधारने पर बल देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, “गांवों में देखता हूँ कि सरकारी स्कूलों की अच्छी बिल्डिंग हैं, काफी एरिया है, क्वालिफाइड शिक्षक हैं, लेकिन लोग अपने बच्चों को ऐसे छोटे प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं जिसमें प्लेग्राउंड भी नहीं है और जहाँ उनका आर्थिक शोषण होता है। यह न केवल सरकार बल्कि समाज, NGO, आम नागरिक सबकी जिम्मेदारी है कि वे सरकारी स्कूलों पर अपना ध्यान फोकस करें।”

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भारतीय होने पर गर्व कीजिए, भारत की उपलब्धियों पर गर्व कीजिये और हर हाल में राष्ट्र को सर्वोपरि रखिए। “भारत आज बुलंदियों पर है लेकिन कुछ सिरफिरे परेशान हैं और मजबूत भारत को मजबूर भारत बताना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।

श्री धनखड़ ने छात्रों से कहा कि वे कभी टेंशन ना लें और असफलता के भय से भयभीत न हों। असफलता का भय सबसे बुरी बीमारी है। दुनिया का कोई भी बड़ा काम एक प्रयास में नहीं हुआ है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग कराते समय आखिरी क्षण में कुछ गड़बड़ी आ गयी थी। लेकिन उसी से सीख कर हमारे वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चन्द्रमा की सतह पर उतार दिया।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को नदी से सीखने की सलाह देते हुए कहा कि जैसे नदी अपना रास्ता स्वयं बनाती है वैसे ही युवाओं को अपनी रुचि और एप्टीट्यूड के अनुसार जीवन में कैरियर चुनना चाहिए, लोगों से प्रभावित होकर या उनके दबाब में आकर जीवन के निर्णय नहीं करने चाहिए। “आप स्वतंत्र नदी बनिये, बंधे हुए किनारों वाली नहर नहीं,” उन्होंने कहा।

स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियों का उदाहरण देते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि ये सभी कॉलेज ड्राप आउट्स थे लेकिन उनमें कुछ नया करने का जुनून था। डिग्री की आज सीमित अहमियत है, मुख्य बात है आपकी काबिलियत & आपकी स्किल।

उभरते भारत की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल तकनीक, DBT और पारदर्शिता के जरिये भ्रष्टाचारियों और दलालों को सत्ता के गलियारों से दूर कर दिया गया है। उन्होंने युवा छात्रों से अपील की कि वे जीवन में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस रखें, संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों पर भी अमल करें।

इस अवसर पर कोटा की विभिन्न कोचिंग संस्थानों के छात्र व शिक्षक उपस्थित रहे। तत्पश्चात उपराष्ट्रपति जी ने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के पूर्व छात्रों से भी मुलाकात की।

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